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हम सभी के पास हर दिन एक ही संख्या में घंटे होते हैं। यदि हम एक दिन में उन चौबीस को खर्च करते हैं जो हमारे पास एक कुशल तरीके से हैं तो हम कार्यों को पूरा करने और दिन के लिए अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल हो सकते हैं। यदि हम व्यर्थ गतिविधियों पर अपना समय बर्बाद करते हैं तो हम या तो उन कार्यों को करने पर जोर देते हैं जो हमें करने की आवश्यकता होती है या जो करने की आवश्यकता होती है वह करने में विफल रहते हैं। यदि हम अपने अल्पकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होना चाहते हैं तो हमें अपने समय को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने की आवश्यकता है। अपने लिए टाइम टेबल बनाना सबसे अच्छा है। टाइम टेबल व्यावहारिक होना चाहिए ताकि हम वास्तव में इसका पालन कर सकें। अन्यथा हम समय-सारणी का पालन करने में असमर्थ होने के कारण मोहभंग और तनाव में आ जाएंगे। हमें अपनी दैनिक दिनचर्या में आराम और विश्राम की गतिविधियों को भी समायोजित करना चाहिए ताकि हम कुशलता से काम करने में सक्षम महसूस करें। हमारे पास एक व्यायाम आहार भी होना चाहिए जो हमें शारीरिक रूप से स्वस्थ और स्वस्थ रख सके। एक अनुशासन और एक शेड्यूल बनाए रखने से हम अपने कार्यों को लक्ष्यबद्ध तरीके से या गलत तरीके से करने के बजाय अपनी गतिविधियों और लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं ।
यह हमारी सोच पर निर्भर करता है यदि हमे अपने लक्ष्य को पने की लालसा है तो मन को लक्ष्यबध तरीके से काम पर लगा सकते है।

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अपेक्षित परिणाम नहीँ आते जब कि हमारी सोच भी सही है और नियत भी। सोच + समय का जब समागम होता है =समयानकूल परिणाम मिलता है अब वह परिणाम आपके अनुकूल है या नही यह भी आपकी सोच पर निर्भर करता है।जो बात आपके अनुकूल नही है कोई जरूरी नही की वह दूसरे को भी प्रतिकूल होगी। मेरे विचार से हर एक का समय अलग अलग होता है।

सोच

बिना बिचारे जो करे सो पाछे पछताय, काम बिगारे आपनो जग मे होत हसाये ।। 😑😡