जब आप बहुत खुश हो वहा अपनी खुसी ( मन वचन और कर्म से )जाहिर करने से पहले थोडा रुको फिर देखो 5 मिनट क्या होता है। ठीक इसी प्रकार जब आप बहुत दुखी होते है तो इसी प्रकार दुख जाहिर करने से पहले थोडा 10,5 मिनट रुको और फिर देखो दिमाग मे क्या हलचल होती जो आपको बदल देती है।
अपेक्षित परिणाम नहीँ आते जब कि हमारी सोच भी सही है और नियत भी। सोच + समय का जब समागम होता है =समयानकूल परिणाम मिलता है अब वह परिणाम आपके अनुकूल है या नही यह भी आपकी सोच पर निर्भर करता है।जो बात आपके अनुकूल नही है कोई जरूरी नही की वह दूसरे को भी प्रतिकूल होगी। मेरे विचार से हर एक का समय अलग अलग होता है।