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जब आप बहुत खुश हो वहा अपनी खुसी ( मन वचन और कर्म से )जाहिर करने से पहले थोडा रुको फिर देखो 5 मिनट क्या होता है।
ठीक इसी प्रकार जब आप बहुत दुखी होते है तो इसी प्रकार दुख जाहिर करने से पहले थोडा 10,5 मिनट रुको और फिर देखो दिमाग मे क्या हलचल होती जो आपको बदल देती है।

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अपेक्षित परिणाम नहीँ आते जब कि हमारी सोच भी सही है और नियत भी। सोच + समय का जब समागम होता है =समयानकूल परिणाम मिलता है अब वह परिणाम आपके अनुकूल है या नही यह भी आपकी सोच पर निर्भर करता है।जो बात आपके अनुकूल नही है कोई जरूरी नही की वह दूसरे को भी प्रतिकूल होगी। मेरे विचार से हर एक का समय अलग अलग होता है।
हम सभी के पास हर दिन एक ही संख्या में घंटे होते हैं। यदि हम एक दिन में उन चौबीस को खर्च करते हैं जो हमारे पास एक कुशल तरीके से हैं तो हम कार्यों को पूरा करने और दिन के लिए अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल हो सकते हैं। यदि हम व्यर्थ गतिविधियों पर अपना समय बर्बाद करते हैं तो हम या तो उन कार्यों को करने पर जोर देते हैं जो हमें करने की आवश्यकता होती है या जो करने की आवश्यकता होती है वह करने में विफल रहते हैं। यदि हम अपने अल्पकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल होना चाहते हैं तो हमें अपने समय को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने की आवश्यकता है। अपने लिए टाइम टेबल बनाना सबसे अच्छा है। टाइम टेबल व्यावहारिक होना चाहिए ताकि हम वास्तव में इसका पालन कर सकें। अन्यथा हम समय-सारणी का पालन करने में असमर्थ होने के कारण मोहभंग और तनाव में आ जाएंगे। हमें अपनी दैनिक दिनचर्या में आराम और विश्राम की गतिविधियों को भी समायोजित करना चाहिए ताकि हम कुशलता से काम करने में सक्षम महसूस करें। हमारे पास एक व्यायाम आहार भी होना चाहिए जो हमें शारीरिक रूप से स्वस्थ और स्वस्थ रख सके। एक अनुशासन और एक श...

सोच

बिना बिचारे जो करे सो पाछे पछताय, काम बिगारे आपनो जग मे होत हसाये ।। 😑😡